Monday, October 13, 2014

रिसरा, कोलकाता मे मंचित होएत 'मिथिलाक अभिशाप'

समदिया : भास्कर झा
कोलकाता : मिथिलाक कल्याण परिषद जयश्रीक (रिसरा) 32म वार्षिकोत्सवक उपलक्ष्यमे मिथिलाक कल्याण परिषद द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमक तत्वावधानमे दर्शकक विशेष मांग पर मैथिलीक मौलिक एकांकी नाटक "मिथिलाक अभिशाप" केर पुनर्मंचन दिनांक 16 नवम्बर 2014क रवि दिन संध्यामे रिसराक रवीन्द्र भवन प्रेक्षागृहमे भेनाइ सुनिश्चित कयल गेल अछि। एहि नाटकक लेखक ओ निर्देशक छथि श्री शंभूनाथ मिश्रा । बेताबी जे इ नाटक सन 1992मे बहुभाषी लघुनाटक प्रतियोगिता, इलाहाबाद मे श्रेष्ठ एवं निर्देशन के लेल सेहो सम्मानित भेल  छल।

आशा अछि अहू बेर ई नाटक "मिथिलाक अभिशाप" मिथिलाक जनमानसकें अपना दिस आकृष्ट करबामे सामर्थ्यवान होयत । ई नाटक मिथिलाक अभिशाप दहेज रुपी महादानवक कट्टर विरोधी अछि जाहिमे लेखक ओ निर्देशक शंभूनाथ मिश्रा प्रत्येक चरित्रके मनोरंजनात्मक एवं व्यंग्यात्मक ढंगसं मिथिलाक अभिशापकें उघार करबाक सचेष्ट प्रयास कयलनि अछि एवं मिथिलाक नारीकें परदाक पाछूसं एवं घोघ तरसं हटा पुरुष समाजक बनावल प्राचीन प्रारंभिक दहेजक दलान पर मरल प्रबुद्ध सामाजक बीच आनि एकटा क्रान्तिमे विरोध करबाक कतिपय चेष्टा कयलनि अछि।

एहिमे भाग लेबय बला प्रमुख कलाकार छैथ स्वयं लेखक ओ निर्देशक शंभुनाथ मिश्रा, श्रीमती शशिता राय, दिनेश मिश्रा, संजय ठाकुर, केदारनाथ साह, सुधीर झा, रमेश मिश्रा, पीयूष कुमार, दिलीप चौधरी, विनय चौधरी आदि। 

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