Saturday, October 20, 2012

भाषाक रक्षा केनाय कर्तव्य : अमर

वयोवृद्ध साहित्यकार आ साहित्य अकादमी के महत्तर सदस्य पं॰ चंद्रनाथ मिश्र अमर कहलैथ जे वैश्वीकरण आ भाषिक संक्रमणक एहि युग मेँ मैथिली भाषा के रक्षा केनाय सभ मैथिलक कर्त्तव्य थीक।पं॰ मिश्र बीतल काल्हि आदित्य सदन,मिश्रटोला,दरभंगा­ मेँ साहित्यकार आ पत्रकार लंबोदर झाक मैथिली कथा संग्रह 'उछन्नर' के लोकार्पणक पश्चात बाजि रहल छलैथ।पं॰ मिश्र कहलैथ जे जिनका पर मैथिलीक प्रचार-प्रसारक जिम्मेवारी देल जाए आवैह जौँ ओहि भाषाक संग क्रूर मजाक करय लागय तऽ एहि सऽ बेसी दुर्भाग्यक बात और की होयत।पं॰ मिश्र दरभंगा आकाशवाणी केँद्र के मैथिलीक उद्घोषक सभ पर मैथिली भाषा संग भद्दा मजाक कैलजयबा पर घोर आपत्ति जतौलैथ।पं॰ मिश्र उछन्नर कथा संग्रहक कथा आ ओकर शब्दक प्रयोगक प्रशंसा करैत कहलैथ जे एहि तरहक कथा सऽ मिथिलाक मैट-पइनक सुगंध भेटैत अछि।लोर्कापित पुस्तक पर अपन समीक्षकीय टिप्पणी करैत डा॰ भीमनाथ झा कहलैथ जे उछन्नरक कथा सभ अत्यंत रोचक अछि जे पाठक के बांधि रखबा मेँ समर्थ अछि।कार्यक्रमक मुख्य अतिथि अशोक कुमार ठाकुर कथाकार केँ भाषा प्रयोग मेँ सतर्क रहबाक सलाह देलखिन।विशिष्ट अतिथि डा॰ अमरनाथ झा कहलैथ जे कथाकार लंबोदर झाक वृत्ति आ प्रवृत्तिक क्षेत्र दोसर रहल हो मुदा इ जबरदस्त मैथिली प्रेमी छैथ।अमलेँदु शेखर पाठक कहलैथ जे जाहि तरहेँ भाषिक संक्रमणक अखुनका समय मेँ मैथिलीक ठेठ शब्द लुप्त भऽ जा रहल हँ ओहि स्थिति मेँ लंबोदर झा सन साहित्यकार चुनि-चुनि के अपन रचना मेँ मैथिलीक टेठ ग्राम्य शब्दावली केर प्रयोग कऽ रहल छैथ,इ अन्य रचनाकारक लेल अनुकरणीय अछि।धन्यवाद ज्ञापन स्नातकोत्तर मैथिली विभागक अध्यक्षा डा॰ वीणा ठाकुर केलैथ।समारोह मेँ डा॰ सुरेश्वर झा,डा॰ विद्याधर मिश्र,शंकर झा,दिलीप कुमार,शीतल कुमारी केर संग पैघ संख्यामेँ साहित्यकार आ साहित्य प्रेमी उपस्थित छलैथ।

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