Sunday, September 1, 2013

टूटि गेल अंतिम स्तंभ

पटना/सहरसा : मैथिली आ हिंदीक प्रमुख साहित्यकार आ साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता 79 बरखक प्रो मायानंद मिश्र अंतिम सांस बीतल शनिक भोर साढ़े चारि बजे लेलनि। मैथिली साहित्यमे ललित-राजकमल-मायानंद तीन प्रमुख स्तंभ मानल जाइत अछि, ओकर अंतिम कड़ी काल्हि टूटि गेल। सहरसा निवासी प्रो मायानंद मिश्र केँ बरख 1988 मे साहित्य अकादमी मैथिली रचना‘मंत्र-पुत्र’ लेल अकादमी पुरस्कारसं सम्मानित कएने छल।
एकरा संग बरख 2007मे लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कारक रूपे ‘प्रबोध सम्मान’ सं सम्मानित कएल गेल छल। बिहार सरकारक राष्ट्रभाषा सम्मान संगे कतको पुरस्कार आ सम्मानसं सम्मानित कएल गेल छल। प्रो मिश्र कहानी, कविता आ उपन्यासक 2 दर्जनसं बेसी रचना मैथिली आ हिंदी साहित्यमे केलनि। स्व मिश्रक पुत्र प्रो विद्यानंद मिश्र बतौलनि जे बेगूसरायक सिमरिया घाट पर रविकेँ अंतिम संस्कारक काज संपन्न होएत।

** जीवन परिचय **

# नाम - प्रो मायानंद मिश्र

# जन्म तिथि - 17 अगस्त 1934

# जन्म स्थान - बनैनिया, सहरसा

# शिक्षा - स्नातकोत्तर

# सेवा -
1. आकाशवाणी पटनाक चौपाल कार्यक्रममेमैथिली कंपोजिटर
2. मैथिली प्राध्यापक, सहरसा कॉलेज, सहरसा

# प्रमुख रचना - भांगक लोटा, आगि मोम आपाथर, चंद्रबिंदू (सभटा खिस्सा), खोता आ चिड़ै, मंत्र पुत्र (मैथिली रचना)
माटी के लोग सोने की चिड़िया, प्रथमं शैल पुत्री च, मंत्र पुत्र, पुरोहित, स्त्री-धन (हिंदी रचना)

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