Thursday, October 17, 2013

दरभंगा महाराजक घर धरि चलैत छल ट्रेन, एहन छल शान!

दरभंगा : दरभंगा नरेश कामेश्वर सिंह अप्पन शानो-शौकत लेल भरि दुनियामे विख्यात छलथि। अंग्रेज शासक द्वारा हिनका महाराजाधिराजक उपाधि देल गेल छल। ओ जतय अंग्रेजक विश्वासी आ कृपापात्र शासक छलथि ओतहि महात्मा गांधी हुनका अप्पन बेटा समान मानैत छलथि। दरभंगा महाराज गांधीजीक बहुत लग छलथि। आजादीसं पहिले ओ महात्मा गांधीक एकटा प्रतिमा बनौलनि, जेकरा विंस्टन चर्चिलक भतीजी प्रख्यात कलाकार क्लेयर शेरीडेन बनौने छलथि। एहि प्रतिमाक प्रदर्शन तत्कालिक गवर्नमेंट हाउस (वर्तमानक राष्ट्रपति भवन) मे कएल गेल छल। एकरा खुलासा 1940 मे महात्मा गांधी द्वारा लॉर्ड लिनलिथगो केर चिट्ठीसं भेल। गांधीजी जखन 1947 मे मिथिला भ्रमण पर आएल छलथि तऽ एकटा इंटरव्यूमे ओ कहने छलथि जे दरभंगा महाराज बहुत नीक इंसान छथि। ओ हमर पुत्र समान छथि। बताबी जे महाराज कामेश्वर सिंहक जन्म जतय 1907 मे भेल छल, ओतहि हुनक मृत्यु 1962 मे भेल छल। कामेश्वर सिंह दरभंगा राजक अंतिम महाराज छलथि। दरभंगा महाराज कतेको एहन काज केलनि, जाहिसं ज्यादातर लोक आइयो अनभिज्ञ छथि। इ उत्तर भारतक एकमात्र राजपरिवार छल जेकर घरक सीढ़ी यानी रानी महल धरि रेल पटरी बिछल छल जे आइयो मौजूद अछि।दरभंगा महाराजक लग बड़ी लाइन आ छोटी लाइन लेल अलग-अलग सैलून छल जाहिमे ओ यात्राक दौरान आराम करैत छलथि। एहिमे मात्रे नहि कीमती फर्नीचर छल, बल्कि सोने-चांदी सेहो जड़ल छल। कालांतरमे सैलून बरौनीक रेलवे यार्डमे रखि देल गेल। दरभंगा महाराज लग दू टा पैघ जहाज सेहो छल। जखन दुनियामे दोसर विश्वयुद्ध चलि रहल छल, तखन दरभंगा महाराज एयरफोर्स केँ तीन फाइटर प्लेन देने छलथि। एकर पाछूक मकसद इ छल जे विश्वयुद्धमे भारतमे राज केनिहार अंग्रेजक फौज कामयाब होए। चूंकि ओ महात्मा गांधीक संग-संग अंग्रेजक विश्वासी छलथि। दरभंगा महाराज अंग्रेजक सेनामे कार्यरत प्रत्येक हिंदु आ सीख सैनिक केँ 5-5 हजार रूपया पावनि मनेबा लेल देने छलथि। एकरा संगे आर्मी मेडिकल कॉर्प लेल 50 एम्बुलेंस सेहो देने छलथि। महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह बहादुर इंडियन नेशनल कांग्रेसक फाउंडर मेंबर छलथि। अंग्रेजसं मित्रतापूर्ण संबंध होएबाक बावजूद ओ कांग्रेस केँ बहुत आर्थिक मदद करैत छलथि।महाराजा कामेश्वर सिंह पर एकटा किताब प्रकाशित भेल छल, जेकर नाम 'करिज एंड बनेवलंस: महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह' अछि। एहि किताबक मानी तऽ दरभंगा महाराज कतेको दिग्गज नेताक मददि केलनि। एहिमे देशक पहिल राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जयपुर केर महाराजा, रामपुर केर नवाबक संग साउथ अफ्रीकाक स्वामी भवानी दयाल संन्यासी सन लोक छलथि। दरभंगा महाराज देशक सबसं पैघ जमींदार होएबाक संग-संग बहुत पैघ इंडस्ट्रीयल सेहो छलथि। हुनक 14 इंडस्ट्रीयल यूनिट्स छल, जाहिमे सुगर, आयरन, स्टील, प्रिंट मीडिया आदिक कारोबारसं जुड़ल छलथि। एहि कंपनीक शुरुआत ओ नव जमानाक रंग केँ भांपि कऽ केने छलथि। एहिसं कतेको गोटाकेँ रोजगार भेटल आ राज सिर्फ किसानसं खिराजक वसूली पर आधारित नहि रहल। आय केर नव स्रोत बनल। एहिसं स्पष्ट होइत अछि जे दरभंगा नरेश आधुनिक सोचक व्यक्ति छलथि। दरभंगा महाराजक क्षेत्र 2500 स्क्वायर माइलमे पसड़ल छल, जाहिमे बिहार आ बंगालक 4,495 गाम आ 18 सर्किल अबैत छल। एहि क्षेत्रक देख-रेख केर जिम्मा 7,500 अधिकारी लग छल। दरभंगा महाराज शैक्षिक संस्थानक विकासक लेल बहुत मदद केलन्हि। किताबक अनुसार ओ कलकत्ता यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, पटना यूनिवर्सिटी आ बिहार यूनिवर्सिटीमे सेहो मदद केलन्हि। दरभंगा महाराज संगीत आ अन्य ललित कलाक संरक्षक छलथि। 18म सदीसं दरभंगा हिंदुस्तानी क्लासिकल संगीतक पैघ केंद्र बनि गेल छल। उस्ताद बिस्मिल्ला खान, गौहर जान, पंडित रामचतुर मल्लिक, पंडित रामेश्वर पाठक आ पंडित सियाराम तिवारी दरभंगा राजसं जुड़ल मशहूर संगीतज्ञ छलथि। उस्ताद बिस्मिल्ला खान तऽ कतेको बरख धरि दरबारमे संगीतज्ञ रहला। कहल जाइत अछि जे हुनक बचपन दरभंगामे बीतल। गौहर जान बरख 1887 मे पहिल बेर दरभंगा नरेशक सोझां प्रस्तुति देलनि। फेर ओ दरबारसं जुड़ि गेलि। दरभंगा राज ग्वालियरक मुराद अली खानक बहुत सहयोग केलक। ओ अप्पन समयक मशहूर सरोदवादक छलथि। महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह स्वयं एकटा सितारवादक छलथि। ध्रुपद कऽ लऽ दरभंगा राजमे बहुतो नव प्रयोग भेल। ध्रुपदक क्षेत्रमे दरभंगा घराना केर आइ एकटा अलग स्थान अछि। महाराज कामेश्वर सिंहक छोट भाई राजा विश्वेश्वर सिंह प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता आ गायक कुंदनलाल सहगल केर मित्र छलथि। जखन दूनू दरभंगा केर बेला पैलेसमे भेटैत छलथि तऽ गप्प, गजल आ ठुमरीक दौर चलैत छल। राज बहादुरक बियाहक समारोहमे कुंदनलाल सहगल आएल छलथि आ ओ हारमोनियम पर गेने छलथि - 'बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए।' दरभंगा राजक अप्पन फनी ऑरकेस्ट्रा आ पुलिस बैंड छल। इ छल दरभंगा महाराज पर बहुत छोट सन आलेख! साभार : दैनिक भास्कर

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