Tuesday, March 11, 2014

सिकलीगढ़, पूर्णिया मे जरल छली होलिका

पूर्णिया : जिलाक बनमनखी प्रखंडक सिकलीगढ़मे अखनो ओ ठाम अछि जतय होलिका, प्रहलाद केँ अप्पन कोरामे लऽ जरैत चिताक बीच बैस गेली आ भगवान नरसिंहक अवतार भेला जेकरा बाद हिरण्यकश्यपक वध भेल।

पौराणिक कथाक मानी तऽ हिरण्यकश्यपक किलामे भक्त प्रहलादक रक्षा लेल एक खाम्हसं नरसिंह भगवानक अवतार भेल। नरसिंहक अवतार सं जुड़ल खाम्ह (माणिक्य स्तम्भ) आइयो ओतहि अछि। कहल जाइत अछि जे एहि स्तम्भ केँ कतेको बेर तोड़बाक कोशिश कएल गेल मुदा इ खाम्ह नहि टूटल।
हिन्दू धर्मक पत्रिका 'कल्याण' क 31म बरख विशेषांक मे सिकलीगढ़क विशेष रुपे विवरण दैत एकरा नरसिंह भगवानक अवतार ठाम बताएल गेल अछि। क्षेत्रक लोक कहैत छथि जे एकर कतेको प्रमाण अछि, एतय हिरन नामक नदी बहैत अछि। किछु बरख पहिले धरि नरसिंह स्तम्भक छेदमे पाथर देबा पर ओ हिरन नदीमे पहुंचि जाइत छल। एतय भीमेश्वर महादेवक विशाल मंदिर अछि। मान्यता अछि जे हिरण्यकश्यप एतहि बैसि पूजा करैत छल। हिरण्यकश्यपक भाई हिरण्यकच्छ बराह क्षेत्रक राजा छल, जे आब नेपालमे अछि। सकलीगढ़ मे अखनो छाओर आ माटि सं होली खेलल जाइत अछि। कहल जाइत अछि जे जखन होलिका जरि गेल छली आ प्रहलाद चिता सं सकुशल आएल छलथि तखन लोक सभ छाओर आ माटि लगा खुशी मनौने छलथि आ तखने सं होली शुरु भेल। अखनो एतहि होलिका दहनमे हजारोँ लोक छाओर आ माटिसं होली खेलाएत छथि। आइयो मिथिलाक लोक रंगक संग छाओर आ माटिक होली खेलाएत छथि।
बहुतो मिथिलावासी केँ अखनो इ जानकारी नहि अछि जे पहिल होलिका दहन मिथिलाक माटि पर भेल छल।

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