Monday, October 27, 2014

कोना जीबत मिथिलाक्षर ?

मुजफ्फरपुर/पूर्णिया/मिथिला प्राइम : मैथिलीक अप्पन प्राचीन स्वतंत्र लिपि रहितो एकर सभटा काज देवनागरी लिपिमे होइत अछि। मिथिलाक्षर मात्र धरोहर बनि कऽ रहि गेल अछि। एकर एकटा दुरुहता अछि। एखनो एम॰ ए॰ केँ सिलेबसमे मात्र एकटा प्रश्न दस अंकक मिथिलाक्षर संबंधी पूछल जाइत अछि। स्नातक परीक्षामे सेहो मात्र 10 अंक आवंटित अछि। मैथिली भाषा-साहित्यक आधार देवनागरी अछि। देवनागरी राष्ट्रीय जन स्वीकृतिक कारणेँ मिथिलाक्षर दिनोदिन कात-करौटमे चलि गेल अछि। मिथिलाक्षर केँ बढ़ाबय लेल 1991ई॰ मे अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद् आ मिथिला संघर्ष समिति मिथिलाक्षर सिखाबय लेल अलग-अलग दू ठाम स्कूल खोलने छल। मिथिलाक्षरक जानकार लोकनि केँ एहि काजमे लगाओल गेल छल मुदा प्रयत्न निष्फल रहल।
आइयो मिथिलाक्षर केँ सीखऽ जानऽ बला लोकनिक संख्या बड़ कम अछि। तीन चारि महीनामे दुनू टा स्कूल बन्द भऽ गेल छल। अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद् आ मैथिलीसँ जुड़ल अन्य कयेक संस्था सभ मिथिलाक्षर वर्णमाला पोथी छापि वितरित कयने छल। इहो प्रयास कारगार साबित नहि भऽ सकल। तखन फेर आब कोना जीबत मिथिलाक्षर ?

0 comments:

Post a Comment