Tuesday, December 16, 2014

नहि रहला शैलेन्द्र

कोलकाता/दरभंगा : 19 अप्रैल 1964 मे जनमल शैलेन्द्र 50 पूरा क चलि गेला। कुमार शैलेन्द्र बीतल जून सं लगातार बीमार छलथि, बेसी बीमार रहबाक कारणे दू दिन पाहिले हुनका नीक इलाज़क़ लेल कोलकाता आनल गेल, ओ एतहि विशुद्धानन्द अस्पतालक आईसीयू मे भर्ती छलथि, हुनका मुंह सं आवाज़ धरि नहि निकलैत छल मुदा आई करीब साढ़े ग्यारह बजे समाद आयल जे ओ नहि रहला। शैलेन्द्र जी शारीरिक रुपे बीमार त छलथिये मुदा मानसिक रुपे सेहो बीमार भ गेल छलथि।



ओ सोशल साइट फेसबुक पर 16 अक्टूबर कें अप्पन अंतिम बात रखने छलथि, ओकर अंतिम पाती छल "कृपया, हमरा अखन जीबय दी, अखन हम जीबय चाहैत छी" एहि सं पहिलहुं 13 अक्टूबर कें ओ लिखने छलथि, "भूल-चूक, लेना-देनी माफ़ करब, अलविदा"।

शैलेन्द्र जी कें कोनो एकटा विधा मे बान्हब मुश्किल छल, दरभंगा सं प्रकाशित मिथिला आवाज़ मे ओ संपादक पर कार्यरत छलथि, एहि सं पाहिले ओ प्रभात खबर, पटना मे आ दिल्ली मे मेट्रो लाइव मे कार्यरत छलथि। शैलेन्द्र आकाशवाणी पटना सं सेहो जुरल छलथि। शैलेन्द्र मात्रे पत्रकार नहि छलथि, ओ साहित्यकार-पत्रकार-रंगकर्मी सभ छलथि। हिनकर कतेको रचना परिछन, अंतिका आदि मे प्रकाशित रहल अछि, हिनका द्वारा लिखल बहुतो नाटक अप्रकाशित रहल अछि। 'देसिल वयना' जे हिनका द्वारा लिखल नाटक अछि बड्ड लोकप्रिय रहल, इ नाटक कतेको बेर हिंदी मे सेहो मंचित भेल। मैथिली सीरियल 'दीयर भौज' हिनके द्वारा लिखल आ निर्देशित अछि जे सौभाग्य मिथिला टीवी चैनल पर प्रसारित होइत छल।

कुमार शैलेन्द्र क जाएब मैथिलीक एकटा अपूरणीय क्षति अछि, मिथिला प्राइम दिस सं हिनका श्रद्धांजलि !

भास्करानन्द झा, 8 दिसंबर कें इ शैलेन्द्र जी लेल लिखलनि मुदा शैलेन्द्र जी नहि रुकला.

उद्धत छी अहां
चलिए जेबाक लेल
ओहि पार
छोरि एहि पारक
मोह माया, माल जाल
निज जन निर्जन
निजस्व ओ
परस्वक भेद-भाव
तोड़ि अपनत्व
केर बान्हल बन्हनन...!

अछिए अहांक हृदय
दगधल,विदीर्ण
लोहछल मन
जीर्ण- शीर्ण शरीर
छल प्रपंचक
पटाक्षेप लेल
रंगमंचकें
करय लागल छी
अहां अंतिम प्रणाम !

यो भैया....
रुकि जाउ ने
आब ...
नहिं बनत केउ खलपात्र
केउ नहिं करत
अहांक दोहन
लेखन-धर्मसं पदच्यूत
नहिं हरत अहांक
बौद्धिक क्षमता
रचना-सर्जना
अहांक रहल अछि
सोनसन संसार
नहिंएटा
लगाबय देबै ककरो
कोनो उक्का
वा अपमानक आगि..

रावणो बनत लछमन
सदिखन अहांक संग
हर्खक पुष्पकमे
घूरत सगरो समांग
बनले रहब अहां
मिथिला-वनक पुष्पेन्द्र
नाट्य-लेखन
अभिनयक मुख्य केन्द्र
मैथिल सरल हृदय
हितकारी सबल शैलेन्द्र..!

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