पांचजन्य चेरिटेबल ट्रस्ट दिससं आयोजित समारोहक अध्यक्षता करैत साहित्य अकादमी, नई दिल्लीक मैथिलीक प्रतिनिधि डॉ. वीणा ठाकुर कहलनि जे मिथिला शक्तिक भूमि अछि। लोकार्पित उपन्याससं समाज केँ गति भेटत। समाज केँ आध्यत्मिक दिशा देबामे उपन्यासक लेखक ई. नमोनाथ झाक भूमिका सराहनीय अछि। LNMU केर मैथिलीक विभागाध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र नाथ मिश्र कहलनि जे मिथिला सदैव संस्कृति आ शिक्षाक भूमि रहल अछि आ मिथिला परंपराक एकटा अलग पहिचान अछि। डॉ. अशोक मेहताक संचालनमे आयोजित समारोह केँ सेवानिवृत न्यायाधीश रूक्मिणी कांत, विद्यानाथ झा विदित, शिवकान्त झा, सुनीता झा, अनवारूल हक, दिलीप कुमार आदि अप्पन विचार रखलनि।
लोकार्पित भेल ' तेसर बुद्ध'
दरभंगा : कोनो भाषा विचारक आदान-प्रदानक सशक्त माध्यम अछि। मिथिलाक धरती सदिखन साहित्य, अध्यात्म आ चिंतन लेल चर्चित रहल अछि। इ गप्प वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भीमनाथ झा बीतल बृहस्पति केँ मैथिली उपन्यास 'तेसर बुद्ध' केर लोकार्पणक मौका पर कहलनि। पिंडारूच गाम स्थित नाट्य परिषद भवनमे आयोजित लोकार्पण समारोह केँ संबोधित करैत मैथिली अकादमी पटनाक पूर्व अध्यक्ष कमलाकान्त झा कहलनि जे मिथिलाक लोक शक्तिक पूजारी रहल छथि। नारी केँ जखन उचित सम्मान भेटत तऽ समाजक समग्र कल्याण निश्चित अछि।
पांचजन्य चेरिटेबल ट्रस्ट दिससं आयोजित समारोहक अध्यक्षता करैत साहित्य अकादमी, नई दिल्लीक मैथिलीक प्रतिनिधि डॉ. वीणा ठाकुर कहलनि जे मिथिला शक्तिक भूमि अछि। लोकार्पित उपन्याससं समाज केँ गति भेटत। समाज केँ आध्यत्मिक दिशा देबामे उपन्यासक लेखक ई. नमोनाथ झाक भूमिका सराहनीय अछि। LNMU केर मैथिलीक विभागाध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र नाथ मिश्र कहलनि जे मिथिला सदैव संस्कृति आ शिक्षाक भूमि रहल अछि आ मिथिला परंपराक एकटा अलग पहिचान अछि। डॉ. अशोक मेहताक संचालनमे आयोजित समारोह केँ सेवानिवृत न्यायाधीश रूक्मिणी कांत, विद्यानाथ झा विदित, शिवकान्त झा, सुनीता झा, अनवारूल हक, दिलीप कुमार आदि अप्पन विचार रखलनि।
पांचजन्य चेरिटेबल ट्रस्ट दिससं आयोजित समारोहक अध्यक्षता करैत साहित्य अकादमी, नई दिल्लीक मैथिलीक प्रतिनिधि डॉ. वीणा ठाकुर कहलनि जे मिथिला शक्तिक भूमि अछि। लोकार्पित उपन्याससं समाज केँ गति भेटत। समाज केँ आध्यत्मिक दिशा देबामे उपन्यासक लेखक ई. नमोनाथ झाक भूमिका सराहनीय अछि। LNMU केर मैथिलीक विभागाध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र नाथ मिश्र कहलनि जे मिथिला सदैव संस्कृति आ शिक्षाक भूमि रहल अछि आ मिथिला परंपराक एकटा अलग पहिचान अछि। डॉ. अशोक मेहताक संचालनमे आयोजित समारोह केँ सेवानिवृत न्यायाधीश रूक्मिणी कांत, विद्यानाथ झा विदित, शिवकान्त झा, सुनीता झा, अनवारूल हक, दिलीप कुमार आदि अप्पन विचार रखलनि।
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