मिथिला मे मलाहक हाल बेहाल
सहरसा : मिथिला, माछ, पान आ मखानक लेल प्रसिद्ध रहल अछि। बाढ़ि प्रभावित मिथिलाक अधिकांश भागमे बरख भरि पानि रहबाक कारणे माछ पालनक व्यापक संभावना अछि। सरकार द्वारा मत्स्यपालक लेल कतेको योजना चलाएल जा रहल अछि मुदा योजना धरातल पर नहि उतरि रहल अछि परिणामस्वरुप रोटीक खोजमे क्षेत्रक मलाह आन प्रदेशमे भटकि रहल छथि।
जानकारक मानी तऽ मिथिलामे आंध्र प्रदेशसं बेसी मत्स्यपालनक संभावना अछि। एतुक्का माछ देशक आन भागक माछसं बेसी स्वादिष्ट होइत अछि मुदा, सरकार आ विभागक लापरवाहीक कारणे बाजारक अभावमे एतुक्का माछ आन ठाम पठा देल जाइत अछि आ एतुक्का लोक आंध्र प्रदेशक माछ खेबा लेल मजबूर छथि।
कोसी तटबंधक पूर्वी भागमे 5 किलोमीटर धरि बरख धरि पान रहैत अछि। एहि माटि पर कृषि काज सेहो नहि भऽ पाबेत अछि। एहिमे जौँ मत्स्यपालनक योजना बनाएल जाय तऽ जमीनक उपयोग तऽ होएबे करत आ एहिसं लोग लाभांवित हेता। एकरा संगे एहि जिलामे लगभग साढ़े चार सौ सरकारी आ निजी जलकर अछि मुदा सरकारसं अपेक्षित सहयोग नहि भेटबाक कारणे एहि क्षेत्रमे मत्स्यपालन नहि भऽ पबैत अछि। मलाह माछक बीज लेल कोलकाता पर निर्भर अछि, नहि तऽ मलाह केँ ऋण भेटैत अछि आ नहि बीमाक लाभ भेटैत अछि। उचित प्रश्रयक अभावमे जिलामे माछ पालनक अपार संभावना दम तोड़ि रहल अछि।
मिथिला मे माछक बढ़िया व्यापार कैल जा सकै जौँ इहां के सरकार ध्यान दैत
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